सिंध🇵🇰 में हिंदू मेघवार परिवारों पर बर्बर हमला🚨 – क्षेत्र में भड़की तीखी नाराज़गी
November 19, 2025
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इस्लामकोट, सिंध (11 अक्टूबर 2025): हिंदू मेघवार परिवारों पर हुए हिंसक हमले ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश की लहर दौड़ा दी है। थरपारकर ज़िले के इस्लामकोट के पास
इस्लामकोट, सिंध (11 अक्टूबर 2025): हिंदू मेघवार परिवारों पर हुए हिंसक हमले ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश की लहर दौड़ा दी है। थरपारकर ज़िले के इस्लामकोट के पास स्थित ग़ालिब शाह गाँव में सैयद और खसखेली समुदाय के लोगों ने कथित रूप से मेघवारों के घरों पर हमला किया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, हमलावरों ने लाठियों से महिलाओं और बच्चों पर हमला किया, जिससे कई लोग घायल और मानसिक रूप से आहत हुए।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और समुदाय नेताओं ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे मानवाधिकारों और सामाजिक न्याय का घोर उल्लंघन बताया है। इस घटना ने एक बार फिर सिंध की अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर हिंदुओं में बढ़ती असुरक्षा की भावना को उजागर किया है, जो पीढ़ियों से इस क्षेत्र में बसे हुए हैं।
एक स्थानीय मानवाधिकार संगठन ने बयान जारी करते हुए कहा—
“शांतिपूर्ण नागरिकों पर इस प्रकार का हमला किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। सिंध पुलिस और स्थानीय प्रशासन को तुरंत कठोर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।”
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद पुलिस ने देर से प्रतिक्रिया दी, जिसके चलते हमलावर मौके से भाग निकले। अब सिविल सोसायटी संगठनों ने प्रांतीय सरकार और संबंधित अधिकारियों से घटना का त्वरित संज्ञान लेने और अपराधियों को सज़ा दिलाने की माँग की है।
सिंध के हिंदू समुदायों में बढ़ता भय
यह कोई एकल घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में सिंध के हिंदू परिवारों ने—
अपहरण
जबरन धर्मांतरण
उत्पीड़न
और ज़मीन हड़पने
जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी की शिकायतें दर्ज करवाई हैं। कई लोग निरंतर भय में जी रहे हैं, अपनी सुरक्षा और भविष्य को लेकर अनिश्चित।
थरपारकर के एक समुदाय बुजुर्ग ने पूछा—
“सिंध के हिंदू वर्षों से डर और अत्याचार में क्यों जी रहे हैं? पाकिस्तान में अल्पसंख्यक असहाय क्यों छोड़ दिए जाते हैं, और उनकी कमजोरियों का फायदा क्यों उठाया जाता है?”
अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ बढ़ती हिंसा और भेदभाव ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चिंता को जन्म दिया है। मानवाधिकार पर्यवेक्षकों का मानना है कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर जारी अत्याचार तत्काल हस्तक्षेप और जवाबदेही की माँग करता है।
न्याय और सुरक्षा की माँग
मानवाधिकार समर्थकों का जोर है कि यदि कानून का निष्पक्ष और सख्त पालन तथा राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखाई गई, तो ऐसे हमले पाकिस्तान के सामाजिक ढांचे को लगातार कमजोर करते रहेंगे। उन्होंने सिंध सरकार, संघीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से अपील की है कि—
कमजोर समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
जिम्मेदारों को दंडित किया जाए
और समानता तथा न्याय के सिद्धांतों को बहाल किया जाए
ग़ालिब शाह गाँव के पीड़ित अपने घावों और सदमे से उबरने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बड़ा सवाल अब भी खड़ा है—
पाकिस्तान के अल्पसंख्यक कब तक भय में जीते रहेंगे, और सच्चा न्याय कब मिलेगा?
इस मामले और सिंध के हिंदू एवं सिंधी समुदायों से जुड़े अन्य मुद्दों पर अधिक अपडेट और विस्तृत कवरेज के लिए जुड़े रहें—सिंध समाचार के साथ।
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